सरकार ने उच्चतम न्यायालय को जानकारी दी कि चाइल्ड पोेर्नोग्राफी रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी की चाइल्ड पोर्नोग्राफी और रेप वीडियो देखने वालों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने प्रयास आरंभ कर दिए हैं। मंत्रालय ने न्यायालय को बताया कि अंग्रेजी के ऐसे कीवडर््स जो कि आमतौर पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और रेप वीडियो देखने के लिए सर्च किए जाते हैं, की सूची तैयार की गई है। इनकी सूची गूगल, याहू, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को दी गई है, जिससे आवश्यक कदम उठाए जा सकें। यह जानकारी एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने सीबीआई तथा गृह मंत्रालय की ओर से जस्टिस मदन लोकुर और उदय उमेश ललित को दी। सिंह ने कहा, दूसरी भाषाओं में भी ऐसे कॉमन कीवर्ड्स की सूची बनाई जा रही है जो कि इन सभी कंपनियों को दी जाएगी। सरकार ने ऑनलाइन साइबर क्राइम रोकने के लिए www.cyberpolice.gov.in बनाई है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2017 में न्यायाधीशों की पीठ ने गृह मंत्रालय को दस जनवरी से पहले चाइल्ड पोर्नोग्राफी और रेप वीडियो से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने का निर्देश दिया था।

न्यायालय ने यह निर्देश हैदराबाद की एक गैर सरकारी संगठन प्रजावाला की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 3 साल की सुनवाई के बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए यह निर्देश दिया था। इस याचिका में गैर-सरकारी संगठन ने यह दावा किया था कि इस तरह की वीडियो जिनमें रेप और पोर्नोग्राफी दिखाए जाते हैं, समाज में बच्चों तथा महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। एडिशनल सॉलिसिटर ने न्यायालय में बताया कि पोर्टल जब पूर्णतः उपयोग में आने लगेगा तो लोग उसमें अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं और साथ ही शिकायत पर की गई कार्यवाही की जानकारी भी शिकायतकर्ता प्राप्त कर सकेगा।

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