आपराधिक विधि (संशोधन) अध्यादेश, 2018

बारह वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के साथ बलात्कार करने पर मृत्युदंड की सजा का प्रावधान करने वाले आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश को राष्ट्रपति ने 21 मार्च, 2018 को मंजूरी प्रदान कर दी। इस अध्यादेश के माध्यम से बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (पोक्सो) 2012 सहित भारतीय दण्ड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 में भी सख्त बदलाव किए गए हैं।

अध्यादेश के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैंः

* दुष्कर्म के लिए न्यूनतम सजा को 10 वर्ष किया गया है।

* 16 वर्ष से कम आयु की महिला/युवती के साथ दुष्कर्म करने पर न्यूनतम 20 वर्ष की सजा का प्रावधान।

* 12 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ दुष्कर्म करने पर सश्रम कठोर कारावास सहित न्यूनतम 20 वर्ष की सजा और अधिकतम मृत्युदण्ड और आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान।

* पीड़ित के पुनर्वास और चिकित्सकीय खर्चों को पूरा करने के लिए त्वरित एवं न्यायपरक जुर्माना आरोपित करने का प्रावधान।

* पुलिस अधिकारी द्वारा कहीं भी दुष्कर्म करने पर न्यूनतम 10 वर्ष का कठोर कारावास का प्रावधान।

* दुष्कर्म के मामलों में जांच दो माह में पूरी हो जानी चाहिए।

* 16 वर्ष से कम आयु की युवती से दुष्कर्म के आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दिए जाने का प्रावधान।

* दुष्कर्म के मामलों में अपील को छह महीनों में निपटा दिया जाएगा।

भारतीय दण्ड संहिता में संशोधनः

* आईपीसी की धारा 376 में संशोधन करके दुष्कर्म के लिए न्यूनतम कारावास को 7 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दिया गया है। अधिकतम सजा आजीवन कारावास ही बनी रहेगी।

* आईपीसी की धारा 376 में एक नई उपधारा (3) जोड़ी गई है, जो 16 वर्ष से कम आयु की महिला/युवती के साथ दुष्कर्म करने पर न्यूनतम सजा को बीस वर्ष करता है।

* एक नई धारा 376AB को जोड़ा गया है जो प्रावधान करती है कि 12 वर्ष से कम आयु की बालिका के साथ दुष्कर्म करने पर न्यूनतम 20 वर्ष का कठोर कारावास दिया जाएगा और ऐसे व्यक्ति को मृत्युदंड भी दिया जा सकता है।

* धारा 376DA और 37DB प्रावधान करती है कि 16 वर्ष की आयु और 12 वर्ष की आयु से कम आयु की बालिका से सामूहिक बलात्कार में संलग्न व्यक्ति को न्यूनतम आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी।

* 12 वर्ष से कम आयु की बालिका से सामूहिक दुष्कर्म में लिप्त व्यक्तियों के लिए मृत्युदण्ड का भी प्रावधान किया गया है।

* धारा 376(2)(a) में उल्लिखित वाक्य ‘‘पुलिस थाने की सीमा के भीतर जहां उसे नियुक्त किया गया है’’ को हटा दिया गया है। इसमें यह जोड़ा गया है कि पुलिस अधिकारी द्वारा किसी भी स्थान पर दुष्कर्म करने पर उसे न्यूनतम 10 वर्ष का कठोर कारावास दिया जाएगा।

अपराध प्रक्रिया संहिता में संशोधनः

* पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी की तिथि से तीन माह के भीतर दुष्कर्म मामलों से संबंधित जांच पूरी कर ली जानी चाहिए।

* एक उपधारा जोड़कर प्रावधान किया गया है कि दुष्कर्म मामलों में अपील का निपटारा छह माह के भीतर किया जाएगा।

* 16 वर्ष से कम आयु की महिला के साथ बलात्कार के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी।

* धारा 439 में एक उपधारा जोड़ी गई है जो प्रावधान करती है कि 16 वर्ष से कम आयु की युवती से दुष्कर्म के आरोपी व्यक्ति की जमानत हेतु आवेदन की सुनवाई करते समय सूचना देने वाला या उसके द्वारा अधिकृत व्यक्ति की मौजूदगी अनिवार्य होगी।

पोस्को अधिनियम व साक्ष्य अधिनियम में संशोधनः

पोस्को अधिनियम की धारा 42 में संशोधन करके आईपीसी की नई धाराओं 376AB, 376DA, और 376DBको जोड़ा गया है। साक्ष्य अधिनियम की धारा 53, जो चरित्रा के प्रमाण या पूर्व यौन अनुभव के बारे में है, को भी आईपीसी की नवीन धाराओं  जोड़कर संशोधित किया गया है।

 

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