मानव विज्ञान
सत्रहवां संस्करण 2026
ISBN: 81-9864-018-5
पेज संख्याः 404
बाइंडिंगः पेपरबैक
लेखकः राजीव गर्ग, अनुज कुमार सिंह, राजेन्द्र प्रसाद शर्मा
पुस्तक के बारे में…
मानवविज्ञानी एल्फ्रेड एल. क्रोबर मानव विज्ञान को ‘‘विज्ञानों में सबसे अधिक मानवतावादी और मानविकी में सबसे अधिक वैज्ञानिक’’ मानते हैं। जैसा कि यह विषय मनुष्य के क्रमिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विकास के सभी पहलुओं के साथ-साथ सामाजिक, जैविक, भौतिक तथा मानविकी जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों को समाविष्ट करता है। संभवतः इसीलिए अत्यंत वृहद एवं जटिल होने के बावजूद, यह अध्ययन हेतु एक आकर्षक विषय है।
मानव विज्ञान में पुरातात्विक मानवशास्त्र, भाषामूलक मानव विज्ञान, शारीरिक मानव विज्ञान एवं सांस्कृतिक मानवशास्त्र का समग्र अध्ययन एवं अनुसंधान शामिल है। इसके अंतर्गत पृथ्वी पर मनुष्य की विकास यात्रा को स्पष्ट करने हेतु प्राचीन काल के मानव द्वारा निर्मित संरचनाओं या हस्तकृतियों के प्राप्त अवशेषों के अध्ययन के साथ-साथ भाषा की उत्पत्ति, विशेषता, प्रकृति, इतिहास, सामाजिक प्रकार्य तथा बाहुल्यता, और विभिन्न परिस्थितियों तथा वातावरणों के प्रति मानव के अनुकूलन, आचार-विचार एवं रीति-रिवाजों, एक-दूसरे के साथ संवाद तथा सामाजिक व्यवहार के तरीकों का अध्ययन शामिल है।
मानव होना क्या है; विद्यार्थियों को इसका बोध कराने के लिए भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में मानव विज्ञान को एक विषय के तौर पर पढ़ाया जाता है। इसलिए संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा के पाठ्यक्रम में भी इसे एक विषय के रूप में सम्मिलित किया गया है।
प्रस्तुत पुस्तक सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा के नवीन पाठ्यक्रम के दृष्टिगत मानव विज्ञान के सभी पहलुओं एवं क्षेत्रों से संबंधित पर्याप्त अध्ययन सामग्री का समावेश करती है। पुस्तक के ‘परिशिष्ट’ के अंतर्गत विभिन्न विषयों पर सामयिक, विश्लेषणात्मक एवं व्यावहारिक जानकारी का समावेश किया गया है।
इस प्रकार यह पुस्तक सिविल सेवा परीक्षा के परीक्षार्थियों की परीक्षागत आवश्यकताओं के साथ-साथ मानव विज्ञान के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, शोधार्थियों, विद्वज्जनों एवं जागरूक पाठकों की जरूरतों और जिज्ञासाओं का समाधान करने हेतु उपयोगी सिद्ध होगी।
Original price was: Rs.505.00.Rs.288.00Current price is: Rs.288.00.
