यह पुस्तक 15वीं शताब्दी में यूरोपियों के भारत आगमन और भारत पर ब्रिटिश शासन के क्रमिक प्रभुत्व से लेकर 1947 में उपनिवेशी शासन से भारत की स्वतंत्रता तक की अशांत अवधि की समीक्षा करती है।
इसके अलावा, यह भारत पर ब्रिटिश शासन की आर्थिक तथा प्रशासनिक नीतियों के प्रभाव सहित, सामाजिक-आर्थिक मोर्चे पर परिवर्तनों, सुधार आंदोलनों, प्रेस के विकास और शैक्षिक प्रगति पर भी विमर्श करती है।
इस पुस्तक में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत तथा भारतीय नेताओं के समक्ष खड़ी चुनौतियों और लोगों द्वारा मतदान के माध्यम से चुनी गई विभिन्न सरकारों के कार्यों का संक्षिप्त परीक्षण भी करती है।
परिशिष्ट में अध्यायों में उल्लिखित व्यक्तित्वों के अलावा राष्ट्रीय आंदोलन के विभिन्न चरणों से संबद्ध विशिष्ट व्यक्तित्वों के बारे में संक्षिप्त विवरण के साथ ही, एक विशेष खंड में महिला स्वतंत्रता सेनानियों को समाविष्ट किया गया है। इसके अलावा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन (1885–1950); जातीय आंदोलन; भारत के गवर्नर जनरल तथा वायसराय: उनके शासनकाल की महत्वपूर्ण घटनाएं; ब्रिटिश शासनकाल के प्रमुख कानून, शिष्टमंडल और विभिन्न आयोग एवं समितियां, भारतीय क्रांतिकारी संगठन, ब्रिटिश काल में विदेशों पर अधिकार, समाचार-पत्र एवं जर्नल्स, और ब्रिटिश शासित भारत में प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों तथा साहित्यकारों द्वारा दिए गए प्रमुख नारों से संबंधित सूची एवं तालिकाएं भी शामिल की गई हैं।
यह संशोधित संस्करण विभिन्न जनजातीय आंदोलनों, संवैधानिक विकासक्रमों, श्रमिक आंदोलनों तथा स्वतंत्रता आंदोलन से संबद्ध व्यक्तियों के संबंध में नवीन जानकारी का समावेश करता है। कतिपय अध्यायों में नवीनतम जानकारियों के समावेश के साथ संशोधित किया गया है, और यहां तक कि कतिपय अध्यायों की पुनर्रचना की गई है।