यूनेस्को ने इक्वाडोर के कारीगरों के टोपी बुनने के हुनर को मान्यता दी

यूनेस्को के सांस्कृतिक अधिकारियों द्वारा इक्वाडोर के कारीगरों द्वारा बनाई जाने वाली किनारेदार टोपियों को मान्यता प्रदान की। ये कारीगर इन टोपियों को दक्षिण अमरीकी टोकिला पाम पौधे की पुआल से बनाते हैं। इन टोपियों को सामान्यतः पनामा हैट के नाम से जाना जाता है। इन टोपियों का नाम ‘पनामा हैट’ शायद इसलिए पड़ा होगा क्योंकि ये टोपियां पनामा के पास उन लोगों को बड़ी संख्या में बेची गई जो इस क्षेत्रा में अप्रत्याशित लाभ कमाने आते थे। इन किनारेदार टोपियों का उत्पादन अब भी घरों में परिवारों द्वारा किया जाता है। इस उद्योग का केंद्र पनामा शहर से 170 किमी दूर एक जिलाला पिंटाडा है। इन टोपियों में कुछ भी कृत्रिम नहीं लगाया जाता, न ही इसमें कोई मशीनरी का प्रयोग किया जाता है। इसे बनाने के लिए कोई फैक्ट्री भी नहीं है। इन टोपियों को बनाने वाले कारीगर अपने घरों में उन्हीं पद्यतियों से इन टोपियों को बनाते हैं, जो उन्हें पूर्वजों ने सिखाई है। इन टोपियों को बनाने की शुरूआत कई पेड़ों के रेशों की चोटी बनाने से की जाती है, जिन्हें लकड़ी के ढांचे के ऊपर लपेटा जाता है और फिर एक साथ टोपी के ऊपरी हिस्से से मिला दिया जाता है।

रेशे की कई पट्टियों को काला रंगा जाता है जो कि अन्य पौधों की पत्तियों से प्राप्त किया जाता है। इसके बाद मिट्टी में तीन दिन के लिए दबा कर रख दिया जाता है। इन रेशों को अलग-अलग ज्यामितीय डिजाइनों में बुना जाता है।

ये पिंटाओ टोपियां पूरे क्षेत्रा के परिधानों का एक अभिन्न अंग बन गई हैं और इन्हें पारंपरिक नृत्यों और त्योहारों में पहना जाता है। काम की गुणवत्ता के अनुसार, कुछ पिंटाओ टोपियों की कीमत कई सौ डॉलर तक होती है।

यूरोपीय संघ ने फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन को प्रदूषण पर बातचीत करने का अंतिम मौका दिया

यूरोपीय संघ द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण प्रतिवर्ष इस गुट में स्वास्थ्य समस्या में 20 बिलियन यूरो का नुकसान होता है। यदि ये देश अपने रवैये को बदलने में नाकाम होते हैं तो ब्रुसेल्स उन्हें यूरोपीय न्यायालय में ले जा सकता है। यूरोपीय संघ इन देशों को समस्या का समाधान खोजने का अंतिम मौका दे रहा है, यदि अब भी ये देश कोई समाधान नहीं तलाश पाते हैं तो इन्हें न्यायालय में मुकदमे का सामना करना होगा।

फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन, हंगरी, इटली तथा चेक रिपब्लिक, स्लोवाकिया और रोमानिया के पर्यावरण मंत्रियों को बातचीत के अंतिम मौके के लिए बुलाया गया है। इन देशों को यूरोपीय नागरिकों को पार्टिकुलेट मैटर तथा एजोट डाईऑक्साइड से बचाने के लिए बार-बार कहा जाता है परंतु यूरोपीय संघ के 28 सदस्य देशों में से कुल 23 देश वायु गुणवत्ता के मानकों से कहीं अधिक प्रदूषण फैलाते हैं जिससे यूरोप के 130 से अधिक शहरों के निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

यूरोपीय संघ के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में चार में से तीन असामयिक मौतों का कारण प्रदूषण के बारीक कण ही थे। यूरोप के निवासियों में प्रदूषण के कारण अस्थमा, हृदय रोग से लेकर फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है।

ऐसी आशा की जा रही है कि प्रदूषण को कम करने के मुद्दे पर सभी पर्यावरण मंत्राी किसी एक बात पर सहमत होंगे। बुल्गारिया और पोलैंड भी पार्टिकुलेट मैटर की मात्रा को मानकों के अनुसार रखने में असफल हुए थे परन्तु उन्हें बातचीत के अंतिम मौके के लिए इसलिए नहीं बुलाया जा रहा है क्योंकि इन्होंने पहले ही प्रदूषण कम करने की दिशा में कुछ प्रयास प्रारंभ कर दिए हैं।

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता हेतु 22.5 बिलियन डॉलर सहायता राशि की अपील

वर्ष 2018 के लिए संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय सहायता हेतु रिकॉर्ड 22.5 बिलियन राशि की अपील की है। यह सहायता राशि विश्व के 136 मिलियन में से 91 मिलियन लोगों के लिए जुटाने का लक्ष्य बनाया गया है, जो सर्वाधिक असुरक्षित हैं। केवल सीरिया तथा यमन में 10 बिलियन से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि, कई अफ्रीकी देशों में भी ऐसी आवश्यकताओं में बढ़ोत्तरी हो रही है। विवादों के चलते अफ्रीकी तथा मध्य-पूर्व के देशों में मानवीय सहायता की आवश्यकता पांच प्रतिशत से अधिक हो गई है। जितनी सहायता राशि का जो लक्ष्य तय किया गया है वह पिछले साल निवेदन की गई सहायता राशि से एक प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2017 के नवम्बर के अंत तक एजेंसी द्वारा 13 बिलियन डॉलर जुटाए गए जो कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार जुटाए गए धन का एक रिकॉर्ड है।

सीरिया के युद्ध से उपजी समस्याओं के लिए जुटाए गए धन का एक-तिहाई भाग उपयोग में लाया जाएगा। सहायता राशि में से 3.5 बिलियन डॉलर युद्धग्रस्त देशों में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए उपयोग किया जाएगा जबकि 4.2 बिलियन डॉलर की सहायता राशि उन 5.4 मिलियन पंजीकृत शरणार्थियों की सहायता में उपयोग की जाएगी जो सीरिया के पास के देशों में जा चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यमन जहां सर्वाधिक मानवीय आपदा को झेलना पड़ रहा है, के लिए 2.5 बिलियन डॉलर की आवश्यकता है, जिससे उन लोगों को सहायता पहुंचाई जा सके जो अत्यंत खराब स्थिति में जीवनयापन कर रहे हैं। कांगो, इथोपिया, नाइजीरिया, सोमालिया, दक्षिण सूडान तथा सूडान पीड़ितों को सहायता देने के लिए प्रत्येक में एक बिलियन डॉलर से अधिक की आवश्यकता है।

संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि कुछ देशों जैसे कि अफगानिस्तान, इथोपिया, ईराक, माली, यूक्रेन में मानवीय सहायता की आवश्यकताओं में कमी आई है।

डब्ल्यूएचओ गेमिंग डिसऑर्डर को मानसिक बीमारी के रूप में मान्यता देगा

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) गेमिंग डिसऑर्डर को अपने 11वें अंतरराष्ट्रीय व्याधि वर्गीकरण ; बीटा ड्राफ्ट में मानसिक बीमारी की सूची में शामिल करने जा रहा है। डब्ल्यूएचओ ने एक दशक से अधिक समय तक कम्प्यूटर गेमिंग की निगरानी के बाद यह निर्णय लिया है। डेली मेल के समाचार के अनुसार, डाइग्नोस्टिक मैनुअल के मसौदे में कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन के हितों से ऊपर गेमिंग को रखता है, तो यह ‘गेमिंग डिसऑर्डर’ की स्थिति है।

वर्तमान में आईसीडी (मई 1990 का संस्करण) विश्व भर में सौ से अधिक देशों द्वारा प्रयोग किया जा रहा है। आईसीडी का नवीन संस्करण मई 2018 में प्रकाशित होगा। आईसीडी में किसी भी विकार को सम्मिलित करने से वो देश जोकि आईसीडी को ध्यान रखते हुए अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं इलाज तथा रोकथाम हेतु संसाधनों के वितरण का निर्णय लेते हैं, इन परिवर्तनों का भी अनुसरण करते हैं। डब्ल्यूएचओ ने विकार को व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक या कार्य के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हानि के परिणामस्वरूप पर्याप्त तीव्रता के निरंतर या आवर्तक व्यवहार पैटर्न के रूप में परिभाषित किया है। बीटा ड्राफ्ट दिशा-निर्देश के अनुसार, इस विकार के निदान के लिए वीडियो गेम ऑनलाइन या ऑफलाइन खेला जा रहा है, का कम से कम 12 महीनों की अवधि का साक्ष्य आवश्यक है। यद्यपि लक्षण बहुत अधिक पाए जाएं तो स्वास्थ्य कर्मी उन लोगों को भी इसमें शामिल कर सकते हैं जो कम अवधि के लिए खेल रहे हों। डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता के अनुसार, गेमिंग डिसऑर्डर को आईसीडी-प्प् में सम्मिलित करने का अर्थµमात्रा एक नैदानिक वर्णन है ना कि रोकथाम या ईलाज का विकल्प।

संयुक्त राष्ट्र परिषद् ने उत्तर कोरिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए

उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण की प्रतिक्रिया में संयुक्त राष्ट्र परिषद् ने सर्वसम्मति से उत्तर कोरिया पर आर्थिक प्रतिबंध और कड़े कर दिए। इन नए प्रतिबंधों में उत्तर कोरिया की ईंधन आपूर्ति तथा पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में अत्यधिक कटौती की गई है। इस प्रस्ताव को अमेरिका ने पेश किया था, जिसका समर्थन उत्तर कोरिया के समर्थक देश चीन तथा अन्य कई देशों ने किया। ये नए प्रतिबंध पिछले प्रतिबंधों की तुलना में कहीं अधिक कड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्थाई प्रतिनिधि निकी हेली ने कहा, ‘‘यह प्रस्ताव उत्तर कोरिया पर दबाव बढ़ाएगा, मैं विशेष रूप से चीन के सहयोग का आभार व्यक्त करना चाहूंगी, जिन्होंने इस प्रस्ताव पर हमारे साथ काम किया।’’

चीन ने इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया, जिससे पता चलता है कि चीन उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल हथियारों से वैश्विक खतरे को भांप रहा है। चीन के उपराजदूत वू हेताओ ने कहा कि स्थिति नियंत्राण से बाहर जा रही थी तथा खतरा बढ़ रहा था। इन नए प्रतिबंधों में उत्तर कोरिया के ऊर्जा, निर्यात एवं आयात क्षेत्रों और विदेशों में उत्तर कोरियाई नागरिकों पर कठोर प्रतिबंध लगाए गए हैं। समुद्री अधिकारियों से भी उत्तर कोरिया की अवैध तस्करी संबंधी गतिविधियों पर लगाम लगाने को कहा गया है।

संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत मैथ्यू रायक्रोफ्ट ने कहा कि उत्तर कोरियाई शासन पेट्रोलियम पदार्थों का उपयोग अवैध परमाणु एवं बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों में करता है। इस आपूर्ति को बंद करके हम उसकी हथियारों को निर्मित करने एवं तैनात करने की क्षमता को सीमित करेंगे। सुरक्षा परिषद् ने उत्तर कोरिया के खाद्य उत्पादों, मशीनों एवं औद्योगिक तथा विद्युत उपकरण के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरेस ने सुरक्षा परिषद् के इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।

वैश्विक जनसंख्या में प्रवासियों की संख्या में वृद्धि

वर्ष 2000 से अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की कुल संख्या में 49 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जब वैश्विक जनसंख्या में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई। परिणामस्वरूप वैश्विक जनसंख्या में प्रवासियों की संख्या में 2.8 से 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह आंकड़े संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ‘मेकिंग माइग्रेशन वर्क फॉर ऑल’ में दर्शाए गए। इस रिपोर्ट में बाहरी व्यक्तियों से भय की राजनीति पर चिंता दर्शायी गई तथा यह भी कहा गया कि विश्व के अलग-अलग भागों में अत्यधिक लोगों के एक साथ अपना स्थान छोड़ देने के कारण अनियमित अप्रवास एक बड़ी समस्या बन गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘हमारे पास स्पष्ट साक्ष्य हैं, जो कि दर्शाते हैं कि कई समस्याओं के बावजूद अप्रवास व्यक्तियों तथा मेजबान देशों के लिए आर्थिक तथा सामाजिक स्तर पर लाभप्रद है। यह हमारी व्यापक जिम्मेदारी है कि हम अप्रवास के कारण उत्पन्न होने वाले विकल्पों का विस्तार करें।’’ यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्राध्यक्ष एंटोनियों गुटेरेस के दृष्टिकोण-अंतरराष्ट्रीय रचनात्मक सहयोग, जिससे यह खोजा जा सके कि किस प्रकार अप्रवास का बेहतर प्रबंधन किया जा सके, को भी दर्शाती है।

समृद्ध देशों को अप्रवासियों को स्वीकार करने की संयुक्त राष्ट्र की सलाह

संयुक्त राष्ट्र ने विश्व के समृद्ध देशों को सलाह दी है कि वे अपने देशों में अप्रवासियों को आने दें अन्यथा ऐसे देश जनसंख्या में कमी और आर्थिक स्तर में कमी से जूझेंगे। ऐसे देश यदि वैध रूप से अप्रवासियों को अपने देश में प्रवेश नहीं करने देंगे तो अवैध रूप से आने वाले अप्रवासियों को ये किसी भी तरह रोक नहीं पाएंगे।

संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष गुटेरेस ने कहा कि जो देश अप्रवासियों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, वो अपनी ही हानि कर रहे हैं और कहा कि अप्रवासियों को स्वीकार करने की नीति फायदों को बढ़ाती हैं और ऐसा करने से मानव तस्करी करने वाले संगठनों को भी रोका जा सकता है। 11 जनवरी, 2018 को संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष एंटोनियो गुटेरेस ने 11 जनवरी, 2018 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जो कि इस वर्ष सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित अप्रवास हेतु बातचीत के लिए आधार का काम करेगी।

संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष ने कहा कि प्रवासन अप्रवासी और मेजबान समुदाय दोनों के हित में होता है। यह हमारा व्यापक उत्तरदायित्व है कि अप्रवास से उत्पन्न होने वाले विकल्पों को विस्तृत करें।

संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय अप्रवास विशेष प्रतिनिधि लुइस आरबटर ने कहा कि ये रिपोर्ट इस विचार को बदलने का कार्य करेगी कि अप्रवासी केवल नौकरियों को हड़प लेते हैं तथा रिपोर्ट को इस मसले में भी सहायक होना चाहिए कि अप्रवास की नीतियां तथ्यों पर आधारित हों ना कि कल्पना पर।

उन्होंने कहा कि यदि विकसित देश कुल अप्रवास को शून्य के स्तर पर ले जाए, जहां अप्रवासी और उत्प्रवासी की संख्या बराबर हो, तो वहां वर्ष 2020 से वर्ष 2025 तक जनसंख्या में नौ प्रतिशत की कमी आ जाएगी। यह स्थिति आर्थिक प्रगति के लिए हानिकर साबित होगी।

पाकिस्तान में आतंकवाद पर अमेरिका के दृष्टिकोण को चीन ने नकारा

चीन ने अमेरिका के इस दृष्टिकोण को गलत ठहराया है कि, पाकिस्तान ने अपनी जमीन पर पनपते आतंकवाद को समाप्त करने के लिए आवश्यक स्तर पर प्रयास नहीं किए। चीन के विदेशमंत्राी ने कहा कि, चीन ने हमेशा किसी एक देश पर आतंकवाद से सम्बद्ध होने के आरोप का विरोध किया है तथा हम इस बात पर भी सहमत नहीं हैं कि किसी एक देश पर आतंकवाद को समाप्त करने की सारी जिम्मेदारी है।

चीन ने अपने मित्रा राष्ट्र पाकिस्तान का समर्थन किया तथा कहा कि हम पहले भी इस बात को कह चुके हैं कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में बहुत से बलिदान किए हैं। देशों को आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में एक-दूसरे का साथ सम्मानपूर्वक देना चाहिए, ना कि एक-दूसरे के प्रयासों पर उंगली उठानी चाहिए। ऐसा रवैया आतंकवाद को हराने में काम नहीं आ पाएगा। जब-जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान को आतंकवाद को पनाह देने के लिए दोष दिया तब-तब चीन पाकिस्तान के समर्थन में आगे आया।

पाकिस्तान में चीन की एक बड़ी परियोजना चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) का कार्य चल रहा है, जिसमें चीन ने 50 बिलियन डॉलर लगाया है। यही कारण है कि चीन नहीं चाहता कि पाकिस्तान के स्थायित्व में किसी प्रकार से कोई अड़चन आये। पाकिस्तान की सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक स्थिति का सीधा प्रभाव चीन की परियोजना पर पड़ सकता है।

संयुक्त राष्ट्र में जेरूसलम को लेकर अमेरिका के विरुद्ध मतदान

जेरूसलम को इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के अमेरिका के निर्णय के विरुद्ध प्रस्ताव पर भारत तथा विश्व के अन्य 127 देशों ने संयुक्त राष्ट्र में मतदान किया। कुल 9 देशों ने इस प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान किया तथा 35 देशों ने अपने आप को इस मतदान से अलग रखा। भले ही अमेरिका अपने इस निर्णय को लेकर अलग-थलग पड़ गया परंतु, पश्चिमी तथा अरब देशों के सहयोगी देशों ने अमेरिका के पक्ष में मतदान कर उसे अकेला पड़ने से बचा लिया। 193 सदस्यों वाले संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निकी हेली ने महासभा के प्रस्ताव की आलोचना की। निकी हेली ने कहा कि, अमेरिका इस दिन को याद रखेगा जब एक संप्रभु देश के तौर पर अपने अधिकारों का उपयोग करने की वजह से संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस पर एकतरफा हमला हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट करने वाले देशों के अनुदान में कटौती की धमकी दी है।

जेरूसलम के गर्वनर की सील खुदाई में प्राप्त हुई

इजराइल के पुरातत्ववेत्ताओं ने 2700 साल पुरानी मिट्टी की मुहर खोज निकाली है, जोकि उनके अनुसार, जेरूसलम के बाइबिल के राज्यपाल की मुहर है। शिल्पकृति पर हिब्रु में लिखा है नगर के राज्यपाल से संबंधित। संभवतः यह किसी लदान से जुड़ा था या राज्यपाल द्वारा स्मारिका के रूप में भेजा गया था, जो कि जेरूसलम में उस समय पर सर्वाधिक महत्वपूर्ण पद था।

मुहर, जो कि एक छोटे सिक्के के आकार का है, में दो पुरुष एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े हैं तथा घुटने के नीचे तक की लंबाई वाले धारीदार वस्त्रा पहने हैं। पुरुषों के जो हाथ भीतर की ओर हैं वो उठे हुए हैं जबकि बाहर की ओर वाले हाथ नीचे की दिशा में हैं। इसे जेरूसलम के पुराने शहर में यहूदी धर्म की पश्चिमी दीवार के प्लाजा के पास खोद कर निकाला गया है।

पुरातत्ववेत्ता के अनुसार, यह पहली बार हुआ है कि इस प्रकार की सील एक प्राधिकृत उत्खनन स्थल से प्राप्त हुई है। यह खोज 2700 साल पहले जेरूसलम में नगर के राज्यपाल की बाइबिल संबंधी व्याख्या को समर्थन देती है। यह दर्शाती है कि 2700 साल पहले भी जेरूसलम, इजराइल की राजधानी एक सशक्त तथा केन्द्रीय शहर था। बाइबिल में जेरूसलम के 2 गवर्नरों का अस्तित्व उल्लिखित है तथा यह खोज दर्शाती है कि वास्तव में इस प्रकार का पद हुआ करता था।

तुर्की की ‘पक्षी भाषा’ यूनेस्को की लुप्तप्राय श्रेणी में शामिल की गई

तुर्की की एक असाधारण तथा प्रभावशाली सीटी भाषाजिसका प्रयोग तुर्की के सुदूर उत्तरी पहाड़ी इलाकों में गांववासियों द्वारा किया जाता है, को यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया गया। इस भाषा को गायरसन प्रांत में कानाकि गांव के लगभग 10,000 लोगों द्वारा आज भी बोला जाता है। यह भाषा सुपरिष्कृत है तथा स्वरों में सीटी की एक व्यवस्था है जो कि ऊबड़-खाबड़ स्थानों में वार्तालाप के काम आती है, जहां लोग एक-दूसरे को नहीं देख पाते। यह भाषा लगभग 500 वर्ष पूर्व ओटोमन साम्राज्य में आरंभ हुई थी तथा काले समुद्र के क्षेत्रों में फैल गई थी, परन्तु 50 वर्ष पहले तकनीकी में विकास के कारण भाषा को काफी नुकसान हुआ। वर्तमान में मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के कारण इस भाषा के अस्तित्व को खतरा है।

शताब्दियों से यह भाषा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सिखाई जाती है। यद्यपि, अब इस भाषा को अच्छे ढंग से बोलने वाले तथा भाषा के लिए जीभ, दांत तथा उंगलियों का प्रयोग करने वाले वृद्ध हो गए हैं। युवा वर्ग ना तो इस भाषा को अपनाने में किसी प्रकार से इच्छुक है और ना ही इसके शब्दों को परिमार्जित करने के इच्छुक हैं, संभवतः कुछ पीढ़ियों के बाद इसे बोलने वाले लोग ही न बचें। तुर्की के संस्कृति विभाग के अध्यक्ष ने देशवासियों से इस भाषा को बचाने तथा इसका निरंतर प्रयोग करते रहने की अपील की है।

चीन के इंटरनेट का इस्तेमाल करेगा नेपाल

नेपाल के निवासियों ने 12 जनवरी, 2018 से हिमालय पर्वत पर बिछी चीन की ऑप्टिकल फाइबर लिंक के माध्यम से इंटरनेट का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। इसी के साथ साइबर दुनिया से जुड़ने के लिए उनकी भारत पर निर्भरता समाप्त हो गई है। चीन, नेपाल को इंटरनेट सेवा मुहैया कराने वाला दूसरा देश बन गया है।

उल्लेखनीय है कि दिसम्बर, 2016 में नेपाल ने चाइना टेलिकॉम के साथ इंटरनेट बैंडविड्थ के लिए करार किया था। सितम्बर 2017 में इसका परीक्षण शुरू किया गया था। सफल परीक्षण के साथ ही नेपाल अब व्यावसायिक रूप से चीनी बैंडविड्थ के साथ जुड़ गया है।

रासुवागाधी गेटवे के माध्यम से चीनी फाइबर लिंक द्वारा मिलने वाली इंटरनेट की प्रारंभिक गति 1.5 गीगाबाइट प्रति सेकेंड (जीबीपीएस) होगी, जोकि भारत से मिलने वाली स्पीड से कम है। बीरतनगर, भैरहवा और बीरगंज के माध्यम से भारत 34 जीबीपीएस की गति प्रदान कर रहा था। हिमालय पर्वतों में चीन के ऑप्टिकल फाइबर लिंक का वाणिज्यिक परिचालन शुरू हो गया है।

दरअसल, नेपाल में इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में चीन का इंटरनेट बैंडविड्थ नेपाल की बढ़ती मांग को पूरा करने का माध्यम होगा। चीन के इंटरनेट बैंडविड्थ के व्यावसायिक संचालन शुरू होने से नेपाल की इंटरनेट के लिए भारत पर एकमात्रा निर्भरता कम होगी। मौजूदा समय में नेपाल ग्लोबल इंटरनेट कनेक्टिविटी से भारत के टेलिकॉम ऑपरेटर्स से जुड़ा है।

नेपाल और चीन के बीच स्थापित ऑप्टिकल फाइबर लिंक देश भर में इंटरनेट बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। यह नेपाल और चीन के बीच आधिकारिक स्तर के साथ-साथ नागरिक स्तर पर भी द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देगा।