संयुक्त राष्ट्र परिषद् ने उत्तर कोरिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए

उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण की प्रतिक्रिया में संयुक्त राष्ट्र परिषद् ने सर्वसम्मति से उत्तर कोरिया पर आर्थिक प्रतिबंध और कड़े कर दिए। इन नए प्रतिबंधों में उत्तर कोरिया की ईंधन आपूर्ति तथा पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में अत्यधिक कटौती की गई है। इस प्रस्ताव को अमेरिका ने पेश किया था, जिसका समर्थन उत्तर कोरिया के समर्थक देश चीन तथा अन्य कई देशों ने किया। ये नए प्रतिबंध पिछले प्रतिबंधों की तुलना में कहीं अधिक कड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्थाई प्रतिनिधि निकी हेली ने कहा, ‘‘यह प्रस्ताव उत्तर कोरिया पर दबाव बढ़ाएगा, मैं विशेष रूप से चीन के सहयोग का आभार व्यक्त करना चाहूंगी, जिन्होंने इस प्रस्ताव पर हमारे साथ काम किया।’’

चीन ने इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया, जिससे पता चलता है कि चीन उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल हथियारों से वैश्विक खतरे को भांप रहा है। चीन के उपराजदूत वू हेताओ ने कहा कि स्थिति नियंत्राण से बाहर जा रही थी तथा खतरा बढ़ रहा था। इन नए प्रतिबंधों में उत्तर कोरिया के ऊर्जा, निर्यात एवं आयात क्षेत्रों और विदेशों में उत्तर कोरियाई नागरिकों पर कठोर प्रतिबंध लगाए गए हैं। समुद्री अधिकारियों से भी उत्तर कोरिया की अवैध तस्करी संबंधी गतिविधियों पर लगाम लगाने को कहा गया है।

संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत मैथ्यू रायक्रोफ्ट ने कहा कि उत्तर कोरियाई शासन पेट्रोलियम पदार्थों का उपयोग अवैध परमाणु एवं बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों में करता है। इस आपूर्ति को बंद करके हम उसकी हथियारों को निर्मित करने एवं तैनात करने की क्षमता को सीमित करेंगे। सुरक्षा परिषद् ने उत्तर कोरिया के खाद्य उत्पादों, मशीनों एवं औद्योगिक तथा विद्युत उपकरण के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरेस ने सुरक्षा परिषद् के इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।

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