यूरोपीय संघ ने फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन को प्रदूषण पर बातचीत करने का अंतिम मौका दिया

यूरोपीय संघ द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण प्रतिवर्ष इस गुट में स्वास्थ्य समस्या में 20 बिलियन यूरो का नुकसान होता है। यदि ये देश अपने रवैये को बदलने में नाकाम होते हैं तो ब्रुसेल्स उन्हें यूरोपीय न्यायालय में ले जा सकता है। यूरोपीय संघ इन देशों को समस्या का समाधान खोजने का अंतिम मौका दे रहा है, यदि अब भी ये देश कोई समाधान नहीं तलाश पाते हैं तो इन्हें न्यायालय में मुकदमे का सामना करना होगा।

फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन, हंगरी, इटली तथा चेक रिपब्लिक, स्लोवाकिया और रोमानिया के पर्यावरण मंत्रियों को बातचीत के अंतिम मौके के लिए बुलाया गया है। इन देशों को यूरोपीय नागरिकों को पार्टिकुलेट मैटर तथा एजोट डाईऑक्साइड से बचाने के लिए बार-बार कहा जाता है परंतु यूरोपीय संघ के 28 सदस्य देशों में से कुल 23 देश वायु गुणवत्ता के मानकों से कहीं अधिक प्रदूषण फैलाते हैं जिससे यूरोप के 130 से अधिक शहरों के निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

यूरोपीय संघ के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में चार में से तीन असामयिक मौतों का कारण प्रदूषण के बारीक कण ही थे। यूरोप के निवासियों में प्रदूषण के कारण अस्थमा, हृदय रोग से लेकर फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है।

ऐसी आशा की जा रही है कि प्रदूषण को कम करने के मुद्दे पर सभी पर्यावरण मंत्राी किसी एक बात पर सहमत होंगे। बुल्गारिया और पोलैंड भी पार्टिकुलेट मैटर की मात्रा को मानकों के अनुसार रखने में असफल हुए थे परन्तु उन्हें बातचीत के अंतिम मौके के लिए इसलिए नहीं बुलाया जा रहा है क्योंकि इन्होंने पहले ही प्रदूषण कम करने की दिशा में कुछ प्रयास प्रारंभ कर दिए हैं।

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