भाषा के कारण अलग-थलग पड़ा तोशिरो बोलने वाला अंतिम व्यक्ति

एक आदिवासी समूह द्वारा बोली जाने वाली भाषा तोशिरोभाषाविदों तथा मानव विज्ञानियों के लिए एक रहस्य बनी हुई है। तोशिरो पेरू में अमेजन घाटी में आदिवासियों द्वारा बोली जाने वाली भाषा है। आदिवासी स्वयं को बचाने की आशा में घाटी में छिपे हुए थे। वो स्वयं को बाहरी आक्रमणकर्ताओं तथा बीमारियों से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। तोशिरो को जापारोअन भाषा से संबद्ध कर देखा जाता है। समर इंस्टिट्यूट ऑफ लिंगुईस्टिक ने भाषा को जानने वाले एक व्यक्ति को वर्ष 2000 में पाया था। यह व्यक्ति 20 व्यक्तियों के जनजातीय समूह का सदस्य है।

जनजाति के 15 सदस्यों ने तथा दो भाइयों ने नदी के एक मोड़ पर शरण ली थी। समूह में स्वयं को गहरे गड्ढों में छिपाने की व्यवस्था की, जिसे पत्तियों तथा टहनियों से ढका गया। बीसवीं शताब्दी के अंत तक भी बाहरी आक्रमणकारी उन्हें अपना दास बनाने के लिए आते रहे, जिनमें ईसाई मिशनरी और हथियार बंद रबर संग्रह करने वाले शामिल थे। परंतु अंत में सब एक-एक कर मृत्यु को प्राप्त हो गए। एक बच्चे को सोते समय तेंदुए ने मार कर खा लिया। दो अन्य भाई-बहन को सांप ने काट लिया। एक बच्चा नदी में बह गया। एक को शिकार करते हुए चोट लगी तथा खून बह जाने से उसकी मृत्यु हुई। इस सबके बाद मलेरिया और मीसल्स के कारण अन्य सदस्यों की मृत्यु हो गई। अब तोशिरो बोलने वाला अंतिम व्यक्ति अमैडियो गारसिया बचा है। वह इनट्यूटो में निवास करता है। सरकारी भाषाविदों ने अमैडियो के साथ काम करके 1500 तोशिरो शब्दों, 21 कहानियों और 3 गीतों का डाटाबेस तैयार किया है।

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