डब्ल्यूएचओ गेमिंग डिसऑर्डर को मानसिक बीमारी के रूप में मान्यता देगा

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) गेमिंग डिसऑर्डर को अपने 11वें अंतरराष्ट्रीय व्याधि वर्गीकरण ; बीटा ड्राफ्ट में मानसिक बीमारी की सूची में शामिल करने जा रहा है। डब्ल्यूएचओ ने एक दशक से अधिक समय तक कम्प्यूटर गेमिंग की निगरानी के बाद यह निर्णय लिया है। डेली मेल के समाचार के अनुसार, डाइग्नोस्टिक मैनुअल के मसौदे में कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन के हितों से ऊपर गेमिंग को रखता है, तो यह ‘गेमिंग डिसऑर्डर’ की स्थिति है।

वर्तमान में आईसीडी (मई 1990 का संस्करण) विश्व भर में सौ से अधिक देशों द्वारा प्रयोग किया जा रहा है। आईसीडी का नवीन संस्करण मई 2018 में प्रकाशित होगा। आईसीडी में किसी भी विकार को सम्मिलित करने से वो देश जोकि आईसीडी को ध्यान रखते हुए अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं इलाज तथा रोकथाम हेतु संसाधनों के वितरण का निर्णय लेते हैं, इन परिवर्तनों का भी अनुसरण करते हैं। डब्ल्यूएचओ ने विकार को व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक या कार्य के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हानि के परिणामस्वरूप पर्याप्त तीव्रता के निरंतर या आवर्तक व्यवहार पैटर्न के रूप में परिभाषित किया है। बीटा ड्राफ्ट दिशा-निर्देश के अनुसार, इस विकार के निदान के लिए वीडियो गेम ऑनलाइन या ऑफलाइन खेला जा रहा है, का कम से कम 12 महीनों की अवधि का साक्ष्य आवश्यक है। यद्यपि लक्षण बहुत अधिक पाए जाएं तो स्वास्थ्य कर्मी उन लोगों को भी इसमें शामिल कर सकते हैं जो कम अवधि के लिए खेल रहे हों। डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता के अनुसार, गेमिंग डिसऑर्डर को आईसीडी-प्प् में सम्मिलित करने का अर्थµमात्रा एक नैदानिक वर्णन है ना कि रोकथाम या ईलाज का विकल्प।

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