चंद्रयान-II अक्टूबर माह में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के लिए प्रक्षेपित किया जाएगा

चंद्रयान-II अक्टूबर माह में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के लिए प्रक्षेपित किया जाएगा

यद्यपि चंद्रयान-II मिशन भारत का पहला मिशन नहीं है परंतु निश्चित ही यह भारतीय सरकार की सर्वाधिक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। चंद्रयान II का प्रक्षेपण अप्रैल 2018 में किया जाना था परंतु प्रक्षेपण को स्थगित कर दिया गया है और अब इसे अक्टूबर माह में प्रक्षेपित किया जाएगा।

चंद्रयान-II रोवर, जिसकी लागत लगभग 800 करोड़ रुपए है, को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए बनाया गया है। अब तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के बारे में बहुत कम जानकारियां प्राप्त हैं। चंद्रयान-II  चंद्रयान-I परियोजना का ही विस्तृत भाग है।

उल्लेखनीय है कि चंद्रयान I के द्वारा चंद्रमा पर पानी की उपस्थिति पता चली थी। चंद्रयान-II का चंद्रमा पर उतरना ऐसा ही है जैसे कि किसी व्यक्ति का चंद्रमा पर जाना। चंद्रयान-I को भारत के श्रीहरिकोटा केंद्र से वर्ष 2008 में प्रक्षेपित किया गया था, जिसमें 83 मिलियन डॉलर की लागत आई थी। इस अभियान में भारत में निर्मित एक लूनर ऑर्बिटर (चंद्रयान) तथा एक रोवर एवं एक लैंडर शामिल होंगे।

इसरो के अनुसार, उड़ान के समय इसका वजन लगभग 3,250 किलो होगा। ऑर्बिटर 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर चंद्रमा की परिक्रमा करेगा। इस अभियान में ऑर्बिटर को पांच पेलोड के साथ भेजा जाएगा। पांच में से तीन पेलोड नए हैं, जबकि दो अन्य चंद्रयान-1 ऑर्बिटर पर भेजे जाने वाले पेलोड के उन्नत संस्करण हैं।

ऑर्बिटर उच्च रिजॉल्यूशन कैमरा (Orbiter High Resolution Camera) लैंडर के आर्बिटर से अलग होने से पहले लैंडिंग साइट की उच्च रिजॉल्यूशन की तस्वीर देगा। चंद्रयान I के मून इम्पैक्ट प्रोब के विपरीत, लैंडर धीरे-धीरे नीचे उतरेगा।

लैंडर किसी तरह की वैज्ञानिक गतिविधि का प्रदर्शन नहीं करेगा। रोवर सौर ऊर्जा द्वारा संचालित होगा तथा चंद्रमा की सतह पर पहियों के सहारे चलेगा, मिट्टी तथा चट्टानों के नमूने एकत्रा करेगा तथा उनका रासायनिक विश्लेषण करेगा और आंकड़ों को ऊपर ऑर्बिटर के पास भेज देगा जहां से आंकड़ों को पृथ्वी के केंद्र पर भेज दिया जाएगा।

ऑर्बिटर पर पांच तथा रोवर पर दो पेलोड भेजे जाएंगे। भारतीय सरकार की इस परियोजना को अप्रैल से अक्टूबर तक स्थगित करने का कारण है कि विशेषज्ञों द्वारा कुछ परीक्षण सुुझाए गए हैं तथा उनके पूर्ण होने में कुछ समय लगेगा।

 

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